कोलकाता, 23 फरवरी। पूर्व रेल मंत्री और वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता मुकुल रॉय का लंबी बीमारी के बाद रविवार को मध्यरात्रि बाद 1.30 बजे यहां सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने पिता के निधन की पुष्टि की।
दलबदल की राजनीति में माहिर रहे बंगाल के ‘चाणक्य’ मुकुल रॉय
कभी पश्चिम बंगाल की राजनीति के ‘चाणक्य’ और पर्दे के पीछे की रणनीति के माहिर माने जाने वाले 71 वर्षीय मुकुल रॉय का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्हें दिल का दौरा पड़ा तो डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद बचाया नहीं जा सका। मुकुल रॉय लंबे समय से कई स्वास्थ्य समस्याओं, से पीड़ित थे, जिनमें गुर्दे संबंधी समस्याएं भी शामिल थीं।
पीएम मोदी ने मुकुल रॉय के निधन पर शोक व्यक्त किया
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन पर सोमवार को शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा, ‘पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री मुकुल रॉय जी के निधन से दुख हुआ। उन्हें उनके राजनीतिक अनुभव और समाज की सेवा के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।’
Pained by the passing of former Union Minister Shri Mukul Roy Ji. He will be remembered for his political experience and efforts to serve society. Condolences to his family and supporters. Om Shanti. pic.twitter.com/qlrvKM5E2w
— Narendra Modi (@narendramodi) February 23, 2026
कभी ममता बनर्जी के बाद टीएमसी के दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे
मुकुल रॉय को राज्य की राजनीति में कई बार दलबदल के लिए भी जाना जाता रहा। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बिगड़ते स्वास्थ्य के कारण वे सक्रिय राजनीति से काफी हद तक दूर रहे थे। रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और एक समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी के दूसरे सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते थे।
पार्टी के शुरुआती वर्षों में बनर्जी के करीबी विश्वासपात्र रहे रॉय ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को एक सशक्त राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूपीए की दूसरी सरकार के दौरान रॉय ने जहाजरानी मंत्रालय में राज्य मंत्री और बाद में रेल मंत्रालय में मंत्री के रूप में कार्य किया। तृणमूल कांग्रेस के गठन से पहले, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े थे।
2017 में तृणमूल छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे
एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव में रॉय ने 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी और पार्टी के नए नेतृत्व से मतभेदों का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 2017 से 2021 के बीच, वे पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उभरे और राज्य में पार्टी के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
2021 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद टीएमसी में लौटे
मुकुल रॉय 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधायक बने। फिलहाल चुनाव के बाद रॉय तृणमूल कांग्रेस में लौट आए, हालांकि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया।
टीएमसी में उनकी वापसी ने राजनीतिक बहस और विवाद को जन्म दिया, जबकि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा था। हाल के वर्षों में, मुकुल रॉय बीमारी के कारण सार्वजनिक जीवन से काफी हद तक दूर रहे। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है।

