नई दिल्ली, 24 फरवरी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया कि सेवा तीर्थ में लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह संकल्प भी लिया गया कि संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है, जो शासन को नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है। मंत्रिमंडल ने इस अवसर को भारत के विकास पथ में एक प्रतीकात्मक मील का पत्थर बताया।
देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए : पीएम
वहीं पीएम मोदी ने कहा, ‘आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए। इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य की बुनियाद पर बना सेवा तीर्थ राष्ट्रसेवा के कर्तव्य-यज्ञ को निरंतर आगे बढ़ाएगा। इस राष्ट्रयज्ञ में हमारा मंत्र है – यद् भद्रं तन्न आ सुव॥ अर्थात्, जो कुछ शुभ और कल्याणकारी है, जो भी नए विचार हैं, वो हमें अनवरत प्राप्त होते रहें।’
आज युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन नवनिर्मित सेवा तीर्थ में केंद्रीय कैबिनेट की प्रथम बैठक हुई। इसमें देश के लिए कई अभूतपूर्व निर्णय लिए गए।
इस दौरान, कैबिनेट ने ये संकल्प भी लिया कि स्वदेशी सोच, आधुनिक स्वरूप और 140 करोड़ देशवासियों के अनंत सामर्थ्य…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 24, 2026
बैठक को सरकार द्वारा ‘नए भारत के पुनर्निर्माण’ के प्रतिबिंब के रूप में प्रस्तुत किया गया। ब्रिटिश काल की अस्थायी बैरकों के स्थान पर निर्मित ‘सेवा तीर्थ’ को परिवर्तन के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया है – औपनिवेशिक काल के ढांचे को भारतीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक शासन केंद्र से प्रतिस्थापित किया गया है।
बैठक में पारित एक प्रस्ताव में, मंत्रिमंडल ने दोहराया कि ‘सेवा तीर्थ’ में लिया गया प्रत्येक निर्णय 1.4 अरब नागरिकों की सेवा की भावना से प्रेरित होगा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप होगा। सरकार ने परिसर को केवल एक कार्यस्थल नहीं, बल्कि कर्तव्य, समर्पण और जन कल्याण को समाहित करने वाला ‘सेवा का तीर्थस्थल’ बताया।
मंत्रिमंडल ने इस बात पर जोर दिया कि नए परिसर से शासन संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होगा, जिसमें सभी नागरिकों के लिए गरिमा, समानता और न्याय शामिल हैं। इसमें इस बात की पुष्टि की गई कि ‘सेवा तीर्थ’ सत्ता प्रदर्शन के बजाय सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो “नागरिक देवो भव” के सिद्धांत द्वारा निर्देशित होगा – यानी नागरिकों को सर्वोपरि मानना।

