नई दिल्ली, 24 जनवरी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के राजकीय दौरे पर शनिवार को नई दिल्ली पहुंचीं। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ वॉन डेर लेयेन सोमवार को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगी। इस दौरे के बाद इंडिया-ईयू समिट होगी और औपचारिक व्यापार समझौता किया जाएगा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष @vonderleyen जी का आज भारत की धरती पर स्वागत किया।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच संबंध निरंतर सशक्त हो रहे हैं।#IndiaEU #EUinIndia #InvestmentOpportunities @PMOIndia @EU_Commission pic.twitter.com/DtuTP4zEnL
— Jitin Prasada जितिन प्रसाद (@JitinPrasada) January 24, 2026
इस हफ्ते की शुरुआत में दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) से अपने संबोधन के दौरान वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘हम (भारत के साथ) एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब हैं।’ वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता को ‘सभी डील्स की मां’ बताया है क्योंकि नई दिल्ली और ब्रुसेल्स यूएस टैरिफ और चीनी एक्सपोर्ट पाबंदियों की वजह से ग्लोबल ट्रेड की मुश्किलों के बीच बाजार पहुंच बढ़ाना चाहते हैं।
« The mother of all trade deals »
We are closing in on the 🇪🇺🇮🇳 Free Trade Agreement.
See you soon in Delhi. pic.twitter.com/gfiLv2eEam
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 24, 2026
उधर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूरोपियन यूनियन (EU) के सदस्य देशों के राजदूतों से मुलाकात की और यूएस की अप्रत्याशित नीतियों के जवाब में दुनिया की अर्थव्यवस्था को जोखिम से बचाने के लिए और ज्यादा सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत-ईयू के बीच मजबूत जुड़ाव से मजबूत सप्लाई चेन बनाने में मदद मिलेगी, मानवीय सहायता और आपदा राहत, एंटी-पायरेसी कोशिशें और विकास परियोजनाएं जैसी ग्लोबल पब्लिक गुड्स मिलेंगे, और बेहतर ट्रेड, गतिशीलता और सुरक्षा सहयोग के जरिए वैश्विक स्थिरता में योगदान मिलेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड दृष्टिकोण से भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों पर असर पड़ा है। भारत को अमेरिका को कुछ निर्यात पर 50 फीसदी तक टैरिफ रेट का सामना करना पड़ रहा है जबकि ईयू को अब भी वॉशिंगटन के साथ एक व्यापार व्यवस्था को मंजूरी देनी है, जिसकी आलोचना असंतुलित होने के कारण की गई है।
ईयू के विदेश पॉलिसी प्रमुख, काजा कैलास ने भारत को यूरोप के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य के लिए ज़रूरी बताया है. 27 देशों के इस ग्रुप ने भारत के साथ एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी भी आगे बढ़ाई है।
भारत और यूरोपियन यूनियन मिलकर दुनिया की आबादी और सकल घरेलू उत्पाद का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। ईयू के डेटा के अनुसार, 2024 में सामान का आपसी व्यापार 120 बिलियन यूरो तक पहुंच गया, जो पिछले दस वर्षों में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी है जबकि सेवाओं का व्यापार अतिरिक्त 60 बिलियन यूरो तक पहुंच गया।

