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मध्य पूर्व में तनाव के बीच सरकार का फैसला : घरेलू LPG सिलेंडर की उपलब्धता के लिए देशभर में ESMA लागू

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नई दिल्ली, 10 मार्च। इजराइल व अमेरिका बनाम ईरान युद्ध के चलते मध्य पूर्व में उपजे भयानक तनाव का दुनियाभर में असर दिखने लगा है। इसी क्रम में भारत सरकार ने खाना पकाने की घरेलू गैस (एलपीजी) सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चिच करने के लिए देशभर में आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (Essential Services Maintenance Act) ESMA लागू कर दिया है। इसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है।

भारतीय संसद में पारित एक्ट है ESMA

ESMA भारतीय संसद की ओर से 1968 में पारित एक एक्ट है। इसका उद्देश्य कुछ ऐसी सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिनमें बाधा आने से लोगों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह अधिनियम में हड़ताली कर्मचारियों को कुछ आवश्यक सेवाओं में काम करने से इनकार करने पर रोकता है। कर्मचारी बंद या कर्फ्यू को काम पर न आने का बहाना नहीं बना सकते। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, परिवहन और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं में हड़ताल को रोकना है। इससे आम जनता का जीवन प्रभावित न हो। इसे अधिकतम छह माह के लिए लागू किया जा सकता है।

इस श्रेणी में आती हैं ये सेवाएं

LPG की जमाखोरी रोकने के क्रम में ESMA का फैसला

गौरतलब है कि अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान सैन्य संघर्ष को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों में दिख रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। इसके बाद देशभर में ESMA का फैसला लिया गया।

LPG सिलेंडर बुकिंग की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन की गई

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई थी। औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें छह सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती।

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर

अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कम्पनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी। सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।

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