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‘मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देने पर जोर’ – विदेश सचिव ने पीएम मोदी व जिनपिंग के बीच वार्ता की जानकारी दी

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नई दिल्ली/तियानजिन, 31 अगस्त। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग के साथ मुलाकात को लेकर रविवार की शाम विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा हित उनके मतभेदों पर भारी पड़ते हैं और दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए।

दोनों नेताओं की एक वर्ष से भी कम समय में दूसरी बैठक

विक्रम मिसरी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए तियानजिन की यात्रा पर हैं… आज सुबह प्रधानमंत्री का पहला कार्यक्रम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक थी। हमने उस बैठक पर एक बयान जारी किया है। एक वर्ष से भी कम समय में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बैठक है उनकी पिछली मीटिंग पिछले साल अक्टूबर में कजान में हुई थी, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए कुछ रणनीतिक दिशानिर्देश निर्धारित किए थे और दोनों पक्षों द्वारा प्राप्त किए जाने वाले कुछ लक्ष्य तय किए थे।’

प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार हैं

विदेश सचिव ने कहा, ‘वे दोनों इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देश मुख्य रूप से अपने घरेलू विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इसमें वे प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार हैं। उनके बीच आम सहमति का एक एलिमेंट यह भी था कि भारत और चीन के बीच एक स्थिर और सौहार्दपूर्ण संबंध दोनों देशों में रहने वाले 2.8 अरब लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है।’

दोनों देशों के साझा हित उनके मतभेदों पर भारी पड़ते हैं

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साझा हित उनके मतभेदों पर भारी पड़ते हैं और दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए। यह भी माना गया कि यदि एक एशियन सेंचुरी और एक मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर को अस्तित्व में लाना है, जिसके केंद्र में मल्टीपोलर एशिया हो तो भारत और चीन का विकास और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कजान बैठक के बाद द्वपक्षीय संबंधों में आई प्रगति पर दोनों नेता प्रसन्न

दोनों नेता कजान में हुई बैठक के बाद हुई प्रगति, उठाए गए कदमों और उस बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में बनी रही गति पर प्रसन्न थे। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सिद्धांतों की अपनी-अपनी समझ के बारे में बात की, जिससे उम्मीद है कि संबंधों के अन्य पहलुओं पर काम करते हुए दोनों पक्षों के भविष्य के कार्यों को दिशा मिलेगी।

द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने पर जोर

विक्रम मिसरी ने कहा, ‘आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के संदर्भ में विश्व व्यापार को स्थिर करने में भारतीय और चीनी अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मान्यता दी गई। दोनों नेताओं ने एक बार फिर अपने द्विपक्षीय व्यापार घाटे को कम करने, दोनों दिशाओं में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को सुगम बनाने के साथ-साथ नीतिगत पारदर्शिता और रणनीतिक दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।’

पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट के लिए जिनपिंग को आमंत्रित किया

मिसरी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी को 2026 में भारत द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है। राष्ट्रपति शी ने निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के पूर्ण समर्थन की पेशकश की।’

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