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राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच भारत निर्वाचन आयोग रविवार को करेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस

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नई दिल्ली, 16 अगस्त। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) रविवार को अपाह्न तीन बजे नई दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव आयोग की यह पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।

देखा जाए तो चुनाव आयोग के अधिकारियों द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के अलावा अन्य किसी मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना असामान्य बात है। वहीं ECI ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस का विषय अब तक स्पष्ट नहीं किया है, हालांकि सूत्रों ने बताया कि यह विपक्ष दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित हो सकता है।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बार-बार चुनाव आयोग पर मतदान के आंकड़ों में हेराफेरी का आरोप लगाया है और कहा है कि महाराष्ट्र व हरियाणा में विधानसभा और कर्नाटक में लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा को जिताने के लिए ‘वोट चोरी’ हुई थी।

हालांकि चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से उन लोगों के नाम प्रस्तुत करने को कहा है, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्हें मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़ा गया है या हटाया गया है, साथ ही हस्ताक्षरित घोषणापत्र भी प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग ने यहां तक कहा है कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता अपने आरोपों के समर्थन में हस्ताक्षरित शपथ-पत्र देने में विफल रहते हैं तो उन्हें देश को गुमराह करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।

विपक्षी दल कर रहे बिहार में SIR का विरोध

वहीं चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू की है, जिसका विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। इस निर्णय को लेकर उठे सवाल अब संसद के मानसून सत्र में चर्चा का विषय बन गए हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का एकमात्र उद्देश्य, हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और सभी संदिग्ध या अपात्र व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों का विवरण, उन्हें शामिल न करने के कारणों सहित प्रकाशित करने को कहा है, जिसके लिए आयोग सहमत हो गया है।

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