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I-PAC छापेमारी केस : ED पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ममता सरकार ने भी दाखिल की कैविएट

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नई दिल्ली, 10 जनवरी। कोलकाता में दो दिन पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) के कार्यालय व इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी के दौरान खुद सीएम ममता बनर्जी के हस्तक्षेप से उपजा विवाद कलकत्ता हाई कोर्ट से होते हुए अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। ईडी ने इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जबकि ममता सरकार ने शीर्ष अदालत में कैविएट दाखिल करने के साथ आग्रह किया है कि बिना उसे सुने कोई आदेश पारित न किया जाए।

सीएम ममता ने ED की जरूरी फाइलें और मोबाइल फोन छीने

ईडी का आरोप है कि कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अधिकारियों से जरूरी फाइल छीनी थी। हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी ले लिए थे।

सीबीआई जांच की मांग

ED ने आर्टिकल 32 के तहत दायर याचिका में रेड के दौरान हुए पूरे टकराव (शोडाउन) का जिक्र किया है। ED का कहना है कि राज्य की मशीनरी की वजह से एजेंसी को निष्पक्ष जांच करने से रोका गया। इस मामले में पहले ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई 14 जनवरी को होनी है।

ममता सरकार भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार ने भी आज ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की। ममता सरकार ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि यदि ED सुप्रीम कोर्ट जाती है तो कोई भी फैसला देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। कैविएट (Caveat) एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें कोई व्यक्ति कोर्ट को पहले से सूचित करता है कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा या अर्जेंट आवेदन आने की आशंका है, ताकि उसके खिलाफ कोई भी एकतरफा आदेश पारित होने से पहले उसे सुनवाई का मौका मिले।

नेचुरल जस्टिस का सिद्धांत

कैविएट का उद्देश्य नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत को बनाए रखना है। कैविएट याचिका को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 148A के तहत दायर किया जाता है, ताकि व्यक्ति को कोर्ट में अपनी बात रखने का मौका मिले।

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