चेन्नई, 20 जनवरी। तमिलनाडु विधानसभा में सत्र के पहले ही दिन मंगलवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब राज्यपाल आरएन रवि अपना शुरुआती भाषण देने से पहले ही राज्य विधानसभा से बाहर चले गए। विधानसभा के अंदर स्थिति काफी गरमा-गरमी वाली हो गई, जिसमें विधानसभा स्पीकर एम अप्पावु ने राज्यपाल से विधानसभा के तय नियमों और परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया।
‘कार्यवाही के दौरान मेरा माइक्रोफोन बंद कर दिया जा रहा था’
राज्यपाल रवि ने राज्यपाल ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण में ‘बहुत-सी गलतियां होने’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान का सम्मान नहीं किया गया, जिससे उन्हें निराशा हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यवाही के दौरान उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘मैं निराश हूं। नेशनल एंथम को उचित सम्मान नहीं दिया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके भाषण में रुकावट डाली गई।’
राजभवन ने बाद में एक प्रेस रिलीज जारी कर राज्यपाल के वॉकआउट के पीछे के कारणों को बताया। बयान में कहा गया, ‘राज्यपाल का माइक बार-बार बंद किया जा रहा था, और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।’ बयान में यह भी दावा किया गया कि दलितों के खिलाफ अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा जैसे मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन भाषण में इन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि राष्ट्रगान का एक बार फिर अपमान किया गया और मौलिक संवैधानिक कर्तव्य की अनदेखी की गई।
सीएम स्टालिन ने राज्यपाल की कड़ी आलोचना की
वहीं राज्यपाल के सदन से जाने के बाद मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने उनकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वह ‘नियमों, परंपराओं का उल्लंघन करते हुए एक बार फिर सदन से बाहर चले गए हैं।’ स्टालिन ने कहा कि राज्यपाल रवि का व्यवहार उनके उच्च पद के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सदन और उसकी गरिमा का अपमान है।
राज्यपाल रवि का व्यवहार उनके उच्च पद के अनुकूल नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी संविधान में संशोधन के माध्यम से उन प्रावधानों को हटाने का प्रयास करेगी, जिनमें वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल के अभिभाषण को अनिवार्य बनाया गया है। उन्होंने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि सदन राज्यपाल के परंपरागत संबोधन न पढ़ने के व्यवहार को स्वीकार नहीं करता है। साथ ही, इसमें यह भी कहा गया कि केवल सरकार द्वारा तैयार किया गया पाठ ही रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, जो विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु तमिल में पढ़ेंगे।
सदन से प्रस्ताव पारित होने के बाद स्टालिन ने विधायकों को धन्यवाद दिया और कहा कि सरकार द्वार तैयार अभिभाषण को राज्यपाल के हर वर्ष पढ़ने से इनकार करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यपालों द्वारा इस तरह की समस्याएं पैदा करना कई राज्यों में होता है, यह केवल तमिलनाडु में ही नहीं होता।
राज्यपाल ने पिछले वर्ष भी ऐसे ही आरोप लगाकर किया था वॉक आउट
हालांकि यह इस तरह की पहली घटना नहीं थी। पिछले वर्ष भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, जब गवर्नर रवि ‘गहरी पीड़ा’ बताते हुए असेंबली से बाहर चले गए थे और आरोप लगाया था कि ‘भारत के संविधान’ और राष्ट्रगान का अपमान किया गया है।
चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से काफी अहम है विधानसभा सत्र
फिलहाल जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, इस सत्र को राजनीतिक रूप से बहुत अहम माना जा रहा है। AIDMK और BJP सहित विपक्षी पार्टियों से उम्मीद है कि वे सत्ताधारी पार्टी और राज्य सरकार पर कई आरोप लगाएंगी। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनके कैबिनेट सहयोगी इन हमलों का जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे विधानसभा सत्र तनावपूर्ण और राजनीतिक रूप से गरमागरम होने की उम्मीद है।

