इस्लामाबाद, 2 अगस्त। पड़ोसी पाकिस्तान ने एक बार फिर धार्मिक कार्ड खेलते हुए भारत को निशाना बनाया है और धार्मिक नफरत फैलाने की कोशिश की है। इस क्रम में पाकिस्तान के आईएसपीआर के डायरेक्टर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल Do not befriend infidel, Pakistani General targets India , spreads religious hatred, Ahmed Sharif Chaudhry को एक वायरल वीडियो में धार्मिक कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हुए देखा गया।
अफगानों का डीएनए भारतीयों जैसा तो वे मुसलमान कैसे हो सकते हैं?
अहमद शरीफ चौधरी ने कहा, ‘काफ़िरों (गैर-मुसलमानों) से दोस्ती न करें और ईमान वालों का साथ न छोड़ें। अगर आप ऐसा करते हैं, तो समस्या है। फिर आप मुसलमानों में शामिल नहीं हैं।’ उन्होंने भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों पर भी तंज कसते हुए कहा, ‘अफगान कहते हैं कि उनका डीएनए भारतीयों जैसा ही है। अगर यह सच है तो अफगान मुसलमान कैसे हो सकते हैं?’
कभी पाकिस्तान की ‘रणनीतिक संपत्ति’ हुआ करता था अफगान तालिबान
उल्लेखनीय है कि अफगान तालिबान – जो कभी पाकिस्तान की ‘रणनीतिक संपत्ति’ हुआ करता था – अब उसके लिए सबसे बड़ी सिरदर्द बन गया है। डीजी आईएसपीआर ने कहा – ‘टीटीपी और अफगान सरकार का मुख्य हथियार आतंकवाद है। वे अपनी अर्थव्यवस्था, सरकार और यहां तक कि कूटनीति भी आतंक के दम पर चलाते हैं।’ पाकिस्तान ने अपने फायदे के लिए तालिबान का इस्तेमाल मोहरे की तरह किया। हालांकि, 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से दोनों के बीच समस्याएं चल रही हैं।
पाकिस्तान ने सड़ा हुआ गेहूं अफगानिस्तान भेजा?
अफगानिस्तान में खाने-पीने की चीजों के भारी संकट के बीच, ऐसी खबरें आईं कि पाकिस्तान से भेजा गया गेहूं सड़ा हुआ और खाने लायक नहीं था। इसके उलट, अफगानिस्तान के लोगों ने भारत की ओर से आपातकालीन स्थिति में भेजे गए 50,000 मीट्रिक टन उच्च-गुणवत्ता वाले गेहूं की खुलकर तारीफ की। अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का सीमा विवाद भी बढ़ गया है।
बलूचिस्तान पर जनरल ने ‘बाहरी ताकतों’ को जिम्मेदार ठहराया
वहीं बलूचिस्तान में चल रही बगावत के लिए अधिकारी ने ‘बाहरी ताकतों’ को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान के रसूखदार लोगों और कबीलाई सरदारों का एजेंडा एक ही है। उन्होंने कहा, ‘बाहरी ताकतें जानती हैं कि बलूचिस्तान न सिर्फ रणनीतिक तौर पर अहम है बल्कि वहां प्राकृतिक संसाधन और ‘ब्लू इकॉनमी’ (समुद्री संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था) भी भरपूर है। जब बलूचिस्तान तरक्की करेगा तो पूरा पाकिस्तान आगे बढ़ेगा। यही बात उन्हें हजम नहीं होती, इसलिए वे आतंकवादियों और सरदारों के जरिए दखलअंदाजी कर रहे हैं।
ये बयान पाकिस्तानी अधिकारियों की उस पुरानी आदत को दिखाते हैं, जिसके तहत वे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए दबाव में धार्मिक नफरत का सहारा लेते हैं। ऐसे बयानों का इस्तेमाल चरमपंथी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के बहाने के तौर पर भी करते हैं।

