लखनऊ, 25 जून। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य सरकार लोकतंत्र को बचाने वाले ‘लोकतंत्र सेनानियों’ के लिए जल्द ही प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने आपातकाल की 51वीं बरसी ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में यह घोषणा की।
‘लोकतंत्र सेनानियों’ के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना की
सीएम योगी ने ‘लोकतंत्र सेनानियों’ के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना करते हुए कहा कि आज ‘लोकतंत्र सेनानियों’ का सम्मान करते हुए गौरव की अनुभूति हुई। ‘लोकतंत्र सेनानियों’ ने लोकतंत्र को बचाने के लिए जेल की यातनाएं सहीं, इसलिए प्रदेश में जब लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित सरकार आई तो ‘लोकतंत्र सेनानियों’ के सम्मान के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।
आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में…#SamvidhanHatyaDiwas https://t.co/y8mNFiTFMf
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 25, 2026
प्रदेश में 3,780 ‘लोकतंत्र सेनानी’ तथा 1,461 उनके आश्रित
प्रदेश में 3,780 ‘लोकतंत्र सेनानी’ तथा 1,461 उनके आश्रित हैं। सरकार वर्ष 2018 से ‘लोकतंत्र सेनानियों’ व मरणोपरांत उनके आश्रितों को प्रत्येक माह 20 हजार रुपये की सम्मान राशि दे रही है। साथ ही ‘लोकतंत्र सेनानी’ या उनके उत्तराधिकारी (पति अथवा पत्नी) को एक सहायक के साथ पूरे प्रदेश में परिवहन निगम की सभी श्रेणी की बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की गई है। ‘लोकतंत्र सेनानियों’ को राजकीय चिकित्सालयों में निशुल्क चिकित्सा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ
सीएम योगी ने कहा कि अब सरकार लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उलब्ध कराने जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही लोकतंत्र सेनानी के दिवंगत होने पर उनका अंतिम संस्कार भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की व्यवस्था सरकार द्वारा बनाई जा रही है। आने वाली पीढ़ी हमेशा इस बात को ध्यान में रखेगी कि जो भी देश व लोकतंत्र के हित में काम करेगा, सरकारें उन्हें सम्मानित करेंगी।
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ‘लोकतंत्र सेनानियों’ का सम्मान किया। इसमें छह माह तक जेल में व्यतीत करने वाले ‘लोकतंत्र सेनानी’ भारत दीक्षित, गया प्रसाद सोनकर, राम सिंह कुशवाहा (हरदोई), विद्या राम वर्मा (हरदोई), अजय सिंह (बाराबंकी) व ओम प्रकाश गुप्ता (सीतापुर) शामिल रहे।
इस दौरान लोकतंत्र सेनानी भारत दीक्षित ने बताया, ‘आपातकाल लगाने का कोई कारण नहीं था। कांग्रेस बस किसी भी तरह सत्ता में रहना चाहती थी। आपातकाल के दौरान हमारी गिरफ्तारी के समय कपड़े फाड़ दिए गए। हम लोगों ने इसके बाद भी सत्याग्रह में भाग लिया, तब बहुत ज्यादा अत्याचार किए गए।’
लोकतंत्र सेनानी विद्या राम वर्मा ने कहा, ‘इतने साल बीत जाने के बाद भी आपातकाल के बारे में सोचता हूं तो मन भावुक हो जाता है। सीपीआई को छोड़कर बाकी सभी दलों के साथ अत्याचार किया गया। मेरा घर रात में घेरा गया, जैसे किसी डकैत को पकड़ने आए हों। जेल में कैदियों के नाखून उखाड़े गए और जबरन नसबंदी की गई। उस समय की सरकार ने कैसे अत्याचार किए, आज कोई अहसास भी नहीं कर सकता।’

