कोलकाता, 7 मार्च। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शनिवार को कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन यदि कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है। वह इस समय धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने पर राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी
गौरतलब है कि आज ही दिन में नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छोटे कार्यक्रम स्थल को लेकर नाराजगी जताई थी। साथ ही राष्ट्रपति ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया था कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इससे व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश के राष्ट्रपति के लिए तय किए गए प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।
संथाल कॉन्फ्रेंस की राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं थी
फिलहाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।
‘यदि कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं’
सीएम ममता ने कहा, ‘यदि आप साल में एक बार आते हैं तो मैं आपका स्वागत कर सकती हूं, लेकिन अगर आप चुनाव के दौरान आते हैं, तो मेरे लिए आपके प्रोग्राम में शामिल होना मुमकिन नहीं होगा क्योंकि मैं लोगों के अधिकारों में बिजी रहूंगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को उनके प्रोग्राम में राज्य के प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी के बारे में दी गई जानकारी गलत थी। चुनाव से पहले उनके लिए ऐसे प्रोग्राम में शामिल होना हमेशा मुमकिन नहीं होता।
राष्ट्रपति को भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भेजा गया
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति भाजपा की नीतियों के जाल में फंस गई हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की प्राथमिकता राजनीति है जबकि उनकी प्राथमिकता जनता है।
मणिपुर, राजस्थान व महाराष्ट्र में आदिवासियों के साथ अत्याचार के वक्त क्यों चुप थीं?
ममता ने राष्ट्रपति से सवाल करते हुए कहा कि जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे, तब राष्ट्रपति क्यों चुप थीं? उन्होंने यह भी पूछा कि राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासियों के साथ कथित अत्याचार के मामलों में राष्ट्रपति ने सवाल क्यों नहीं उठाए?
चुनाव से पहले राजनीति न करने की दी नसीहत
सीएम बनर्जी ने राष्ट्रपति मुर्मु को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव से पहले उनके साथ राजनीति न की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की थी और न ही उस आयोजन से उनका कोई संबंध था। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के लोगों की भलाई है। भाजपा राजनीति को प्राथमिकता देती है जबकि उनकी सरकार जनता के हितों को सबसे ऊपर रखती है।

