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जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह के साथ बैठक के बाद CJP ने खत्म किया प्रदर्शन, कहा – ‘हमारी सभी मांगें मान ली गईं’

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नई दिल्ली, 25 जुलाई। केंद्र सरकार के साथ तीसरे दौर की बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को दोपहर बाद पिछले एक माह से जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन खत्म करने की घोषणा कर दी।

एक दिन पहले दोनों पक्षों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई थी

उल्लेखनीय है कि नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच शुक्रवार को अपराह्न विट्ठलभाई पटेल हाउस में हुई बैठक हुई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह ने बैठक में सरकार का प्रतिनिधित्व किया था जबकि सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय प्रवक्ताओं – सौरव दास व आशुतोष रांका शामिल थे।

प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी थी सीजेपी, सरकार ने मांगा था 24 घंटे का समय

सरकार ने उक्त बैठक में मुआवजे (नीट की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों के लिए जिन्होंने आत्महत्या की) और छात्रों के खिलाफ एफआईआर और कानूनी मामले वापस लेने की दो मांगों पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। लेकिन सीजेपी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी थी। सरकार ने प्रधान के इस्तीफे पर फैसले के लिए आज दोपहर तक का समय मांगा था और सीजेपी प्रतिनिधियों संग अपराह्न 3.30 बजे बैठक निर्धारित थी।

केंद्र-सीजेपी की बैठक से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

हालांकि उसके पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलनरत युवाओं के नाम एक खुला पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर करते हुए अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रेषित करने की जानकारी दे दी।

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सरकार ने सीजेपी की सभी पांचों मांगें मान लीं

फिलहाल सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच निर्धारित समय पर बैठक हुई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच सीजेपी द्वारा उठाए गई पांच मांगों पर चर्चा हुई और सभी मांगों को सरकार ने मान लिया। इसके बाद सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एलान किया कि अब जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से खत्म हो रहा है।

क्या बोले सौरभ दास

सौरभ दास ने कहा- जंतर-मंतर पर हमारा विरोध, जो कई दिनों से चल रहा था, उसकी तीन मुख्य मांगें थीं- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दिल्ली ही नहीं पूरे देश में दर्ज सभी कानूनी मामले व प्राथमिकी वापस ली जानी चाहिए, प्रदर्शनकारियों या आयोजकों के खिलाफ भविष्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाए। ये सभी मांगें सरकार ने मान ली हैं।

पांच सूत्रीय मांग पत्र के संबंध में लगभग चार सप्ताह में सरकार से फिर मिलेंगे

दास ने आगे कहा, ‘इसके अलावा, हमने सरकार के सामने एक पांच सूत्रीय मांग पत्र भी रखा, जिसमें व्यापक शैक्षिक सुधारों और परीक्षा सुधारों के बारे में बात की गई थी। हम ताकि हम व्यापक सुधारों पर मिलकर काम कर सकें। यदि सरकार इन सभी मांगों पर सहमत होती है तो हम आंदोलन वापस लेना भी चाहेंगे।’

नड्डा बोले, ‘हम उन्हें FIR की कॉपी देंगे और कोई काररवाई नहीं होगी’

वहीं नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘आज हमारी लंबी बातचीत हुई। वे एक लिखा हुआ ड्राफ्ट लाए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन में चल रहे केस के बारे में चार प्वॉइंट्स रखे थे। इसके साथ ही हमने बाकी दो मांगों पर भी बात की – कोई बदले की काररवाई न की जाए, मुआवजा दिया जाए और उनके पांच प्वॉइंट वाले चार्टर पर विचार किया जाए।

नड्डा आगे बोले, ‘हम उन्हें FIR की कॉपी देंगे और कोई काररवाई नहीं होगी। दूसरी बात जो कही गई है, वह यह है कि मुआवजे के बारे में, सरकार ने साफ कहा है कि हमें भी सहानुभूति है। हम सभी ने कहा है कि नियम और कानून के हिसाब से मुआवजा होगा, जो भी ज्यादा से ज्यादा हो सकेगा, उन्हें दिया जाएगा।’

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