लखनऊ, 14 मार्च। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास में आने वाले नवरात्र को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और नौ दिनों तक उपवास तथा पूजा के माध्यम से देवी का स्मरण करते हैं। धार्मिक परंपराओं में यह समय साधना, भक्ति और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ होंगे, हालांकि तिथियों के विशेष संयोग के कारण इस बार यह पर्व आठ दिनों का माना जाएगा।
कब से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र
ज्योतिषीय गणना के अनुसार चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। हिंदू परंपरा में उदय तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए इसी आधार पर नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। इसी दिन से श्रद्धालु घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना प्रारंभ करेंगे और पूरे उत्साह के साथ नवरात्र का पर्व मनाया जाएगा।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना या घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। यह पूजा देवी शक्ति के आह्वान का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय पूजा करना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है। यह मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
इस बार मां दुर्गा का आगमन वाहन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र किस दिन से प्रारंभ होते हैं, उसके आधार पर मां दुर्गा के आगमन का वाहन निर्धारित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जब नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होते हैं तो देवी का आगमन पालकी या डोली पर माना जाता है। वर्ष 2026 में नवरात्र गुरुवार से आरंभ हो रहे हैं, इसलिए इस बार मां दुर्गा के पालकी पर आने की मान्यता बताई जा रही है। कई लोग इसे समाज और जीवन में आने वाले परिवर्तनों का संकेत भी मानते हैं।
नवरात्र में कैसे की जाती है कलश स्थापना
नवरात्र के पहले दिन घर में स्वच्छ स्थान पर मिट्टी रखकर उसमें जौ बोने की परंपरा है। इसके समीप जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है और उसके ऊपर नारियल तथा आम के पत्ते रखे जाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और पूजा स्थल के पास अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है। नवरात्र के पूरे समय तक देवी की आराधना की जाती है और श्रद्धालु सात्विक जीवनशैली का पालन करते हुए पूजा-पाठ में समय बिताते हैं।
तिथि संयोग से इस बार आठ दिन का पर्व
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। यह संयोग 26 मार्च को बनेगा। इसी कारण इस वर्ष चैत्र नवरात्र आठ दिनों के ही माने जाएंगे। इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे यह दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखेगा।
नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के स्वरूपों की पूजा
नवरात्र के दौरान प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। 19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा से नवरात्र का आरंभ होगा। इसके बाद 20 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी, 21 मार्च को मां चंद्रघंटा और 22 मार्च को मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी। 23 मार्च को मां स्कंदमाता और 24 मार्च को मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। 25 मार्च को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी, जबकि 26 मार्च को महाअष्टमी के साथ मां महागौरी की पूजा और राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के इन दिनों में देवी दुर्गा की आराधना से मन में सकारात्मकता का संचार होता है और भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव होता है।

