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केंद्र सरकार ने दी जानकारी : होर्मुज में अब भी 24 जहाज, गल्फ में 23000 भारतीय नाविक फंसे

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नई दिल्ली, 13 मार्च। अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान के कारण मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और बेहद संवेदनशील हो चुके हालात  के बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारी जहाजों (मर्चेंट शिप) पर करीब 23,000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। सरकार ने कहा कि इन सभी नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में 24 जहाजों पर 677 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में चल रहे जहाजों में 76 दूसरे भारतीय नाविक हैं। सरकार इन सभी की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने बताया कि गुरुवार तक इस क्षेत्र में 28 जहाज मौजूद थे, लेकिन उनमें से एक जहाज जग प्रकाश सुरक्षित तरीके से वहां से निकल चुका है।

नाविकों की सुरक्षा के लिए समन्वय

मंत्रालय के अनुसार भारतीय अधिकारियों, जहाज प्रबंधन कम्पनियों और भर्ती एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ भी लगातार संपर्क बनाए रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर नाविकों को मेडिकल मदद और अन्य सहायता तुरंत दी जा सके।

अब तक 3 भारतीय नाविकों की मौत, एक अब भी लापता

सरकार ने बताया कि अब तक इस क्षेत्र में हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और चार लोग घायल हुए हैं। एक और भारतीय नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। घायल नाविकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर इलाज कराया जा रहा है।

टैंकर पर हमले में दो भारतीयों की मौत

मार्च के पहले हफ्ते में Skylight नाम के तेल टैंकर पर हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इनकी पहचान आशीष कुमार और दलीप सिंह के रूप में हुई थी। वहीं मुंबई के दीक्षित सोलंकी उस हमले के बाद से लापता बताए जा रहे हैं।

इराक के पास जहाज पर हमला

इसके अलावा सेफसी विष्णु नाम के टैंकर पर इराक के तट के पास हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। हालांकि, इस जहाज पर मौजूद 15 अन्य भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

युद्ध शुरू होने के बाद 18 जहाज बने निशाना

जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डेमियन साइमन के अनुसार 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक कम से कम 18 जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। इन हमलों के लिए ईरान या ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति तेजी से बदल रही है और भारत अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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