नई दिल्ली, 8 मार्च। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के वक्त उपजी विवादित स्थिति के मामले में केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। केंद्रीय गृह सचिव ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। उनसे पूछा गया है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया?
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया?
ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति मुर्मु शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट के पास आयोजित आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेस में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के मंत्रियों की अनुपस्थिति का जिक्र करते हुए नाराजगी जाहिर की थी। राष्ट्रपति ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले से तय कार्यक्रम स्थल को आखिर क्यों बदला गया। केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने बागडोगरा पहुंचने पर राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत किया था।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल सरकार से कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा है कि राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े सुरक्षा और प्रोटोकॉल से संबंधित ‘ब्लू बुक’ नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया? साथ ही, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि कार्यक्रम का वेन्यू अचानक बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम लोगों की मौजूदगी पर भी असंतोष जताया था। जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पहले बिधाननगर में आयोजित किया जाना था, लेकिन बाद में इसका स्थान बदलकर बागडोगरा के पास कर दिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आमतौर पर जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो मुख्यमंत्री उनका स्वागत करते हैं और अन्य मंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं आईं और राज्यपाल के पद में बदलाव होने के कारण वे भी उपस्थित नहीं हो सके।
वहीं, राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल बदलने को लेकर भी हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए छोटी बहन जैसी हैं और वह खुद भी बंगाल की बेटी हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आया कि तय स्थान पर जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। दरअसल, जिस मैदान पर आयोजन हुआ, वह अपेक्षाओं से काफी छोटा था और संथाली समुदाय के हजारों लोगों को कार्यकम में शामिल हुए बिना मायूस लौटना पड़ा।

