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गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, सूरत सहित सभी 15 नगर निगमों पर कब्जा

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गांधीनगर, 28 अप्रैल। गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्थानीय निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है और सूरत सहित सभी 15 नगर निगमों पर कब्जा जमा लिया है। सूरत नगर निगम में पार्टी ने 127 में से 115 सीटों पर जीत हासिल की।

ग्रामीण स्थानीय निकायों में भी भाजपा प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ग्रामीण स्थानीय निकायों में भी भाजपा एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी है। 1,090 सीटों वाली 34 जिला पंचायतों में भाजपा ने 568 सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 77 और अन्य दलों को 30 सीटें मिलीं। कुल 5,234 सीटों वाली 260 तालुका पंचायतों में भाजपा ने 2,397 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 591 सीटें मिलीं, जबकि अन्य दलों ने 329 सीटें हासिल कीं।

प्रत्येक निगम में भाजपा ने पार किया 50% का आंकड़ा

भाजपा ने प्रत्येक निगम में 50% का आंकड़ा पार कर लिया है। गुजरात भर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वोटों की गिनती मंगलवा को हो रही है। चुनाव आयोग के अनुसार, 15 नगर निगमों में 55.1 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जबकि नगर पालिकाओं, जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों में क्रमशः 65.53 प्रतिशत, 66.64 प्रतिशत और 67.26 प्रतिशत मतदान हुआ था।

मोरबी नगर निगम में पार्टी ने सभी 52 सीटें जीतीं

ओरसाद नगरपालिका में, भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17-17 सीटें जीती हैं जबकि आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम ने एक-एक सीट हासिल की है। भाजपा ने गांधीधाम, कच्छ जिले के भुज, मांडवी, मुंद्रा और अंजार सहित 15 नगर निगमों में से जीत हासिल की है। भगवा पार्टी ने सुरेंद्रनगर, जामनगर, पोरबंदर, करमसाद-आनंद, नाडियाड, नवसारी, वापी, सूरत और मोरबी नगर निगमों में कुल सीटों में से आधे से अधिक सीटें जीती हैं। इनमें मोरबी नगर निगम में पार्टी ने सभी 52 सीटें जीती हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य में 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों की 9,200 सीटों के लिए मतदान हुआ था, जिसमें 4.18 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं ने भाग लिया था। शहरी निकायों में, नवगठित गांधीधाम नगर निगम में सबसे कम मतदान 46.03 प्रतिशत रहा जबकि वापी में सबसे अधिक 72.29 प्रतिशत मतदान हुआ। अहमदाबाद नगर निगम में 51.81 प्रतिशत मतदान हुआ।

ग्रामीण क्षेत्रों में, नर्मदा जिले में सबसे अधिक 84.49 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि पोरबंदर जिला पंचायत में सबसे कम 50.80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा और कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।

हालांकि, सुरेंद्रनगर जिले के एक गांव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में तकनीकी खराबी के कारण मतदान रद होने के बाद दोबारा मतदान कराया गया। ये चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के संशोधित मानदंडों के तहत कराए गए, जिसके कारण कई जिलों में परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन हुआ।

नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नाडियाड, मेहसाना, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर सहित नौ नवगठित नगर निगमों में पहली बार मतदान हुआ। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख दावेदार हैं, साथ ही एआईएमआईएम, एनसीपी और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में रहे।

प्रमुख उम्मीदवारों में पूर्व आईपीएस अधिकारी एम.एल. निनामा, पूर्व रेडियो जॉकी आभा देसाई और पूर्व आप विधायक भूपेंद्र भयानी शामिल हैं। 2021 में, भाजपा ने स्थानीय चुनावों में भारी जीत हासिल की थी और विभिन्न निकायों की 8,470 सीटों में से 6,236 सीटें जीती थीं।

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