नई दिल्ली, 2 फरवरी। बिहार को जल्द ही पहली ‘बुलेट ट्रेन’ की सौगात मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस आशय की घोषणा की। बिहार की राजधानी पटना से गुजरने वाली यह बुलेट ट्रेन देश के तीन बड़े राज्यों को जोड़ेगी। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट पर जल्द ही काम शुरू होगा।
अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘पहली बुलेट ट्रेन बिहार में चलने वाली है। तीन राज्यों को जोड़ने वाली यह ट्रेन वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक चलेगी। यह बुलेट ट्रेन बिहार के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।’ रेल मंत्री ने यह भी बताया कि बिहार में इस वक्त 14 ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनें और 21 ‘अमृत भारत’ ट्रेनें चल रही हैं।
रूट में बिहार के अंदर करीब 260 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक होंगे
बुलेट ट्रेन रूट में बिहार के अंदर करीब 260 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक होंगे। इसे 350 km/h तक की स्पीड के लिए डिजाइन की गई है। यह प्रोजेक्ट अभी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) स्टेज में है। इसमें रूट को फाइनल करने और जमीन की जरूरतों का अंदाजा लगाने के लिए सर्वे चल रहे हैं। पूरा होने के बाद यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर सफर के समय को काफी कम कर देगा।
तमिलनाडु को 7,611 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेलवे बजट
रेल मंत्री ने यह भी बताया कि तमिलनाडु में भी दो नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शुरू किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु को 7,611 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रेलवे बजट मिला है। यह कांग्रेस और UPA सरकारों के दौरान दिए गए एलोकेशन से नौ गुना ज्यादा है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड कैपिटल खर्च की योजना बनाई गई है। अपने लॉन्ग-टर्म विज़न के तहत सरकार ने पर्यावरण के अनुकूल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए शहरों के बीच ‘ग्रोथ कनेक्टर’ के तौर पर सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है।
इन कॉरिडोर में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं। प्रस्तावित कॉरिडोर से एक शहर से दूसरे शहर में यात्रा का समय काफी कम होने और यात्रियों के लिए बिना रुकावट, मल्टीमॉडल मूवमेंट आसान होने की उम्मीद है।
बजट में रेल मंत्रालय को 2,77,830 करोड़ रुपये के आवंटन
उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रेल मंत्रालय को कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 2,77,830 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की। बजट आवंटन में नई रेल लाइनें बनाने और लोकोमोटिव, वैगन और कोच खरीदने जैसे अन्य काम शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में मंत्रालय को 2,52,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आने वाले वित्त वर्ष के लिए यह आवंटन 10.25 प्रतिशत अधिक है। यह अब तक का सबसे ज्यादा आवंटन है। इसके अलावा, मंत्रालय को एक्स्ट्रा-बजटरी संसाधनों से 15,000 करोड़ रुपये मिलेंगे।
रेलवे की कुल 3,85,733.33 करोड़ रुपये कमाई होने का अनुमान
बजट दस्तावेज के अनुसार, रेलवे की कुल 3,85,733.33 करोड़ रुपये कमाई होने का अनुमान है जबकि 3,82,186.01 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष के अंत में 3,547.32 करोड़ रुपये का सरप्लस होगा।
इस बीच रेल मंत्रालय अधिकारी ने कहा, ‘चूंकि रेलवे की कमाई एसेट बनाने और नई परियोजनाओं के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसे सरकार से फंडिंग मिलती है। इसलिए, मंत्रालय को नई लाइनें बिछाने, नैरो गेज को ब्रॉड गेज में बदलने और सिंगल-लाइन रूट को डबल करने जैसे कामों के लिए 2,77,830 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।’
बजट दस्तावेज में विभिन्न निर्माण कार्यों और एसेट निर्माण परियोजनाओं के लिए 2,77,830 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव है। इसमें नई लाइनों के लिए 36,721.55 करोड़, गेज कन्वर्जन के लिए 4,600 करोड़, लाइन डबलिंग के लिए 37,750 करोड़, रोलिंग स्टॉक (लोकोमोटिव, वैगन, आदि) के लिए 52,108.73 करोड़ और सिग्नलिंग और दूरसंचार के लिए 7,500 करोड़ रुपये शामिल हैं।

