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बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला : कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी और करीबी अर्पिता को 3 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में भेजा गया

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कोलकाता, 25 जुलाई। शिक्षक भर्ती घोटाले में बुरी तरह फंसे पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को सोमवार को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पार्थ और अर्पिता को तीन अगस्त तक प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) की कस्टडी में भेज दिया है। ईडी का यह भी कहना है कि अर्पिता ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया है कि उसके घर से बरामद कैश पार्थ का है।

अब तक 22 करोड़ बरामद, 100 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी शेष

न्यायालय में ईडी का कहना था कि यह गंभीर घोटाला है। इन दोनों से पूछताछ की जानी जरूरी है। इस केस में अब तक करीब 22 करोड़ बरामद हो गए हैं, जबकि 100 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी और होनी है।

अर्पिता करीब 12 फर्जी कम्पनियां संचालित कर रही थी

ईडी ने कोर्ट में अर्पिता और पार्थ चटर्जी, दोनों की 14 दिनों की हिरासत मांगी थी। उसका कहना था कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि पार्थ चटर्जी की ‘करीबी सहयोगी’ अर्पिता मुखर्जी ‘वित्तीय गड़बड़ी’ के लिए करीब 12 फर्जी कम्पनियां चला रही थीं।

कोर्ट में एएसजी ने कहा, ‘यह एक गंभीर घोटाला है। हम ईडी की फुल कस्टडी की मांग करते हैं। इस घोटाले में अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं, जिन्होंने रिश्वत के तौर पर मोटी रकम दी है।’

छापेमारी में ईडी ने दो जगहों पर तलाशी ली है, एक पार्थ चटर्जी और दूसरी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर। इस दौरान ज्वॉइंट सेल डीड भी मिली है। सेल डीड में संयुक्त नामों का भी जिक्र है।

जांच में सहयोग नहीं कर रहे पार्थ चटर्जी

एएसजी ने आगे कहा, ‘इससे पता चलता है कि दोनों संयुक्त रूप से संपत्ति खरीद रहे थे। हमने अर्पिता के फ्लैट के दस्तावेज पार्थ के घर से बरामद किए हैं। इसका जब्ती सूची में उल्लेख किया गया है। पार्थ चटर्जी का अर्पिता मुखर्जी से नियमित संपर्क है. पार्थ ने अवैध रूप से पंचनामा फाड़ दिया। वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पार्थ लगातार मोबाइल फोन के जरिए अर्पिता के संपर्क में थे। पार्थ ने अपनी गिरफ्तारी के कागजों पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिया था।

21 करोड़ कैश को अर्पिता की कम्पनियों में लगाना था

ईडी ने कहा कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता की संयुक्त संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। इस संपत्ति को पार्थ ने 2012 में खरीदा था। अर्पिता ने पूछताछ के दौरान यह भी स्वीकार किया कि नकदी पार्थ की है। इन पैसों को अर्पिता मुखर्जी से जुड़ी कम्पनियों में लगाने की योजना थी। नकद राशि भी एक-दो दिन में उसके घर से बाहर ले जाने की योजना थी। मेडिकल जांच के दौरान एम्स भुवनेश्वर ने पार्थ की तबीयत ठीक पाई है।

26 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार हुए थेपार्थ

ईडी ने अर्पिता के घर से 21 करोड़ से ज्यादा का कैश बरामद किया था। अर्पिता से कई घंटे पूछताछ भी की गई थी, जिसमें वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई थीं। बाद में ईडी ने मंत्री चटर्जी से 26 घंटे तक पूछताछ की और दोनों की गिरफ्तारी की थी।

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