बरेली/लखनऊ, 27 जनवरी। गणतंत्र दिवस पर सनसनीखेज तरीके से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को शासन ने सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। उत्तर प्रदेश शासन ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर को जांच सौंपी है। निलंबन की अवधि के दौरान अग्निहोत्री को शामली जिला मुख्यालय से संबद्ध (Attach) किया गया है।
इस्तीफे की वजह : …
शंकराचार्य का अपमान और UGC कानून 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने 5 पन्नों के त्यागपत्र में कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस्तीफे के पीछे मुख्य दो कारण बताए:
1- शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई और उनके प्रति किए गए कथित अपमान से आहत होना।
2- UGC के नए कानून को लेकर असंतोष।
शंकराचार्य का आश्वासन : “धर्म के क्षेत्र में देंगे बड़ा पद” इस्तीफे की खबर मिलते ही ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने देर रात अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बात की। शंकराचार्य ने अधिकारी के कदम की सराहना करते हुए कहा “पूरा सनातनी समाज आपसे प्रसन्न है। सरकार ने आपको जो पद दिया था, हम उससे भी बड़ा पद आपको धर्म के क्षेत्र में देंगे।”
डीएम आवास पर ‘बंधक’ बनाने का आरोपअलंकार अग्निहोत्री ने कल शाम जिला अधिकारी (DM) अविनाश सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की थी। बाहर निकलने के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें वहां करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया और एसएसपी के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। इसके तुरंत बाद रात 11 बजे उन्होंने अपना सरकारी आवास खाली कर दिया।
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री?
बैकग्राउंड : मूल रूप से कानपुर के रहने वाले अलंकार ब्राह्मण परिवार से आते हैं।
करियर : 2019 में 15वीं रैंक के साथ पीसीएस अधिकारी बने।
चर्चा : वे पहले भी अपने कार्यालय में भगवान बजरंग बली की तस्वीर लगाने को लेकर प्रशासनिक हल्कों में चर्चा का विषय रहे हैं। कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन यह तय करेगा कि क्या उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए या उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। फिलहाल, प्रशासनिक हलकों में यह बहस छिड़ गई है कि क्या एक लोक सेवक का धार्मिक भावनाओं के आधार पर इस्तीफा देना सेवा नियमावली (Service Rules) का उल्लंघन है।

