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बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकृत अग्निहोत्री ने त्यागपत्र के बाद सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

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बरेली, 26 जनवरी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में सोमवार को दिन में इस्‍तीफा देने के बाद चर्चा में आए बरेली के नगर मज‍िस्‍ट्रेट अलंकृत अग्‍न‍िहोत्री ने देर शाम मीड‍िया के सामने आकर उनके सवालों के जवाब द‍िए। जब पत्रकारों ने उनसे इस्‍तीफे के बारे में पूछा तो उन्‍होंने कहा क‍ि वह अपने फैसले पर अड‍िग हैं। यह पूछे जाने पर क‍ि क्‍या उन पर कहीं से कोई दबाव तो नहीं द‍िया जा रहा तो उन्‍होंने कहा क‍ि उन पर क‍िसी तरह का कोई दबाव नहीं है।

UGC के नए नियमों के विरोध में सरकारी नौकरी से दिया इस्‍तीफा

उल्लेखनीय है कि अलंकृत अग्‍न‍िहोत्री की मांग मीड‍िया के माध्‍यम से पूरे देश में फैल चुकी है। केंद्र व यूपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्होंने कहा क‍ि केंद्र और राज्‍य सरकारें अपना व‍िश्‍वास खो चुकी हैं। सामान्‍य वर्ग उनसे दूर जा चुका है। उन्‍होंने अपने कोर को ड‍िस्‍टर्ब कर द‍िया है। केंद्र और राज्‍य सरकार क्षत-व‍िक्षत हो चुकी है। इस समय केंद्र और राज्य में अल्पमत की सरकार हो चुकी है। अगर अभी चुनाव हुआ तो वे सत्ता में वापस नहीं आएंगे।

यूजीसी के रेगुलेशन ने पूरे सवर्ण समाज को तोड़ द‍िया है

खुद को समर्थन म‍िलने के सवाल पर अलंकृत अग्निहोत्री ने कहा क‍ि केवल ब्राह्मण ही नहीं, उन्हें सर्व समाज का समर्थन मिल रहा है। उन्‍होंने कहा क‍ि यूजीसी के रेगुलेशन ने पूरे सवर्ण समाज को तोड़ द‍िया है। उन्‍होंने यूजीसी के रेगुलेशन को लेकर कहा क‍ि सवर्ण समाज बहू-बेट‍ियों का रेप करवाने के ल‍िए नहीं है। राजनीत‍ि में जाने की बात को लेकर उन्‍होंने कहा क‍ि आगे जो भी कदम होगा, वह पूरा समाज तय करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के और अन्‍य राज्‍यों के ज‍ितने भी संगठन हैं, सभी का सहयोग म‍िल रहा है। सभी लोग म‍िलने के ल‍िए आ रहे हैं। उनसे वार्ता के बाद न‍िर्णय ल‍िया जाएगा।

बोले – MP-MLA इस्तीफा दें, नहीं तो जब्त होगी जमानत!

अग्‍न‍िहोत्री ने कहा, ‘मैं यहां पर जो भी बात करूंगा, वह स‍िर्फ सजाति या ब्राह्मण एमपी-एमएलए के ल‍िए ही करूंगा। मैं खुद ब्राह्मण हूं तो मेरा सवाल उनसे ही होगा। मैं उनसे कहना चाहता हूं क‍ि वह अपने पदों से तुरंत इस्‍तीफा दे दें। सरकार अल्‍पमत में है। यद‍ि आप उसमें रहते हैं तो आप अपनी प्रति‍ष्‍ठा को खत्‍म कर देंगे। समाज अब आपके ख‍िलाफ है। अगर आपको ट‍िकट मिल भी जाता है और आप वहीं पर कारपोरेट कम्पनी की तरह काम करते रहते हैं तो न‍िश्‍च‍ित ही आपकी जमानत जब्‍त होगी। पूरा ब्राह्मण एवं सवर्ण समाज आपके ख‍िलाफ हो चुका है।’

प्रदेश में न जनतंत्र बचा है और न ही गणतंत्र.. स‍िर्फ भ्रमतंत्र है

उन्‍होंने कहा क‍ि उत्‍तर प्रदेश सरकार ब्राह्मण वि‍रोधी व‍िचारधारा पर काम कर रही है। यह एक ही जात‍ि की सरकार बनकर रह गई है। उन्‍होंने जनप्रत‍िन‍िध‍ियों को लेकर भी काफी उग्र बातें कहीं। उन्‍होंने कहा क‍ि कोई भी एमपी-एमएलए जनता की सुन नहीं रहा है। सब हाथ पर हाथ धरे बैठै हैं। जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होगी, तब तक चुप ही बैठे रहेंगे। ये कुछ भी नहीं करेंगे। यहां पर न तो जनतंत्र बचा है, न ही गणतंत्र। यहां पर स‍िर्फ भ्रमतंत्र है।

‘हमारा देश कॉरपोरेट कम्पनी नहीं है क‍ि फायदा लेकर न‍िकल जाएं’

यूजीसी कानून की वापसी पर अड़ने की बात को लेकर अग्निहोत्री ने कहा क‍ि वह इसको लेकर अड‍िग हैं, अड़ने वाली बात ही नहीं है। उन्‍होंने कहा, ‘इस तंत्र ने जो अलग-अलग अध‍िनियमों से जो सामाजि‍क व्‍यवस्‍था छ‍िन्‍न-भ‍िन्‍न कर दी है, हमें उससे समाज और देश को सही रास्‍ते पर लाना है। हमें ऐसा नहीं करना है क‍ि देश को जातियों और उपजात‍ियों में इतना बांट दें क‍ि देश में स‍िव‍िल वार जैसी स्‍थ‍ित‍ि उत्‍पन्‍न हो जाए। हमारा देश कॉरपोरेट कम्पनी नहीं है क‍ि फायदा लेकर न‍िकल जाएं और समाज को लड़ते हुए छोड़ जाएं।’

यह पूछे जाने पर कि उनका मुख्‍य गुस्‍सा यूजीसी को लेकर है या फ‍िर प्रयागराज की घटना को लेकर, अग्निहोत्री ने कहा क‍ि दोनों व‍िषय ब्राह्मण व‍िरोधी व‍िचाराधारा को लेकर हैं। यूजीसी से केवल ब्राह्मण ही नहीं सवर्ण वर्ग के सभी लोगों पर असर होगा। गौरतलब है कि अग्निहोत्री ने प्रयागराज माघ मेला में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व जिला प्रशासन के बीच उभरे विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बाहर साधु-संन्यासियों की पिटाई को लेकर भी सरकार को खरी-खोटी सुनाई थी।

जब उनसे पूछा गया क‍ि लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं तो क्‍या शुरू से ही सरकार सता रही थी, इस पर उन्‍होंने कहा क‍ि सरकार सताए या न सताए, पर वो एक विचारधारा के तहत काम कर रही है। वो दिखने लगता है और यदि हमारे अंदर चेतना है तो हम प्रभाव‍ित होते हैं।

भाजपा के नेता और अध‍िकारी मिलने आ रहे हैं, क्‍या कोई दबाव है। इस सवाल पर उन्‍होंने कहा क‍ि जिनको चिंतन है, वो सभी म‍िलने आएंगे। सबका लगाव होता है, जो म‍िलेंगे ही। जो भी जनप्रत‍िन‍िध‍ि मिलने आ रहे हैं, वो भी इससे प्रभाव‍ित हैं। उनसे जब पूछा गया क‍ि‍ यदि इस्तीफा स्वीकार नहीं होता तो क्या करेंगे तो उन्‍होंने कहा क‍ि इस्‍तीफा स्‍वीक‍ार करना पड़ेगा क्‍योंक‍ि यह उनका संवैधानि‍क अध‍िकार है।

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