मिर्जापुर, 17 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार देर रात विंध्य क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी विंध्यवासिनी देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। उनके धार्मिक अनुष्ठान स्थानीय भाजपा विधायक एवं पुरोहित रत्नाकर मिश्र ने संपन्न कराए। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री वाराणसी से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर पहुंचे, जहां स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।
उपजिलाधिकारी गुलाब राम भी स्वागत के लिए उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में सरमा ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके बयानों को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि असम में घुसपैठ की समस्या अब भी बनी हुई है और राज्य सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। उनके अनुसार अब तक लगभग 50 हजार एकड़ जमीन खाली कराई जा चुकी है तथा प्रतिदिन 100 से 150 घुसपैठियों को बाहर किया जा रहा है। इतिहास से जुड़े सवाल पर उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान को समान सम्मान देने की बात का विरोध किया।
सरमा ने कहा कि शिवाजी को ‘हिंदू रक्षक’ के रूप में जाना जाता है, जबकि टीपू सुल्तान को लेकर इतिहास में अलग दृष्टिकोण है। विंध्य कॉरिडोर निर्माण कार्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पूर्व की तुलना में अब क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री के दर्शन कार्यक्रम को लेकर प्रशासन सतर्क रहा। विधायक रत्नाकर मिश्र लखनऊ से आकर स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।
वह असली बाबरी मस्जिद नहीं…
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवाने के ऐलान पर तंज करते हुए कहा कि वह असली बाबरी मस्जिद नहीं बल्कि उसकी प्रतिकृति है। शर्मा ने सोमवार को मिर्जापुर में संवाददाताओं से बातचीत में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमांयू कबीर के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने के ऐलान के बारे में पूछे गये एक सवाल पर कहा, ”वह असली बाबरी मस्जिद नहीं है। वह तो डमी है। जब असली ही नहीं रहेगा, तो डमी क्या करेगा?”
तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने का ऐलान किया है। इसे लेकर राजनीतिक विवाद उठा और बयानबाजी हो रही है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने इसके विरोध में उत्तर प्रदेश के लोगों से मुर्शिदाबाद तक पदयात्रा की अपील की थी। अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचे को छह दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने ढहा दिया था। उच्चतम न्यायालय ने नौ नवंबर 2019 को इस मामले में निर्णय देते हुए विवादित स्थल पर राम मंदिर बनवाने और मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिये अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था। राम मंदिर का निर्माण तो पूरा हो गया है लेकिन उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिये दी गयी पांच एकड़ जमीन पर अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ है।

