ढाका, 1 जनवरी। बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। अब शरीयतपुर इलाके में खोकन चंद्र नाम के एक हिन्दू शख्स को भीड़ ने घेर लिया। उसे पहले बेरहमी से पीटा गया, फिर चाकू से वार किया गया और अंत पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की गई।
व्यापारी खोकोन चंद्र दास ने किसी तरह पास के तालाब में छलांग लगाकर अपनी जान बचाई। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल यह हमला दर्शाता है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किस हद तक पहुंच चुका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार (31 दिसंबर) को रात करीब नौ बजे कनेश्वर यूनियन के तिलोई इलाके में यह हमला हुआ। खोकोन चंद्र दास (40), परेश चंद्र दास के बेटे हैं। वे दामुद्या के केउरभंगा बाजार में एक फार्मेसी के मालिक हैं। खोकोन चंद्र अपनी दुकान बंद घर लौट रहे थे। जब वह तिलोई क्षेत्र पहुंचे तो बदमाशों के एक समूह ने उन्हें रोक लिया। हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से वार किए और फिर उनके शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
आग की लपटों से अपनी जान बचाने के लिए खोकोन दास पास के एक तालाब में कूद गए। बाद में, स्थानीय लोगों ने उन्हें गंभीर हालत में बचाया और शरियतपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया। इस घटना से इलाके में व्यापक दहशत फैल गई है। हमले के पीछे का मकसद और इसमें शामिल लोगों की पहचान अब तक पुष्ट नहीं हो पाई है।
बीते दो हफ्ते में हमले की चौथी घटना
बीते दो सप्ताह के अंदर अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हमले की यह चौथी घटना है। इससे पहले गत 18 दिसम्बर को दीपू चंद्र दास को भीड़ ने मार डाला था। फिर उसके शरीर को पेड़ से बांधकर जला दिया गया था। उसपर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। इसके बाद 25 दिसम्बर को भीड़ ने अमृत मंडल को पीट-पीटकर मार डाला था। हालांकि, खुद को किरकिरी से बचाने के लिए बांग्लादेश ने कहा था कि अमृत मंडल क्रिमिनल था और उगाही के चलते भीड़ ने उसको मारा था।
तीसरी घटना 29 दिसम्बर को मेहराबारी इलाके में हुई, जहां सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपित नोमान मिया (29) को गिरफ्तार किया था। आरोपित का कहना था कि उसने मजाक में गोली मारी थी।
देखा जाए तो बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले तख्तापलट के बाद सामने आए हैं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद उग्र प्रदर्शन करने वाले छात्रों के गुटों ने मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया है। यूनुस बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, सामाजिक उद्यमी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं। सरकार संभालने के बाद उन्होंने भारत विरोधी बयान भी दिए हैं।

