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मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद बोले अमित शाह – बस्तर में बंदूक का दौर खत्म, लोग अब खुलकर ले रहे सांस

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जगदलपुर, 19 मई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे के अंतिम दिन मंगलवार को यहां कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के भय से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और अब यहां विकास का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। बस्तर के लोगों के चेहरे पर अब उत्साह, आत्मविश्वास और भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई देती है। बंदूक के साये में जीने का दौर खत्म हो चुका है और पूरा बस्तर अब खुलकर सांस ले रहा है।

दरअसल, अमित शाह ने बस्तर में कई कार्यक्रमों में शिरकत की। माओवाद के आतंक से मिली मुक्ति के बाद यह उनका पहला बस्तर दौरा था। उजर बस्तर के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत शाह ने शहीद पुलिस जवानों के परिवारों से भेंट की। साथ ही उन्होंने बस्तर के लोककला को भी करीब से देखा और समझा।

नक्सलवाद के खिलाफ अभियान पर 4 महत्वपूर्ण तिथियों का किया उल्लेख

दौरे के अंतिम दिन अमित शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में तीन राज्यों – छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय, उत्तराखंड के मुखिया पुष्कर सिंह धामी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की। दिल्ली रवानगी से पहले एक प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए अमित शाह ने ये बाते कहीं। उन्होंने चार महत्वपूर्ण तिथियों का उल्लेख करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ अभियान व उसके बाद विकास की योजना को विस्तार से बताया।

डबल इंजन की सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ नए सिरे से अभियान शुरू किया गया

अमित शाह कहा कि पहली महत्वपूर्ण तिथि 13 दिसंबर 2023 थी, जब छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी। केंद्र में पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार थी, लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण नक्सलवाद के खिलाफ अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। उन्होंने दावा किया कि कई गैर-भाजपा सरकारों ने केंद्र का सहयोग किया, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस अभियान में साथ नहीं दिया। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद बस्तर में बचे हुए नक्सलवाद को खत्म करने के लिए नए सिरे से अभियान शुरू किया गया।

31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा से पहले ही देश नक्सलवाद के आतंकवाद से मुक्त

उन्होंने दूसरी महत्वपूर्ण तिथि 24 अगस्त, 2024 का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन सभी राज्यों के डीजी की बैठक के बाद यह घोषणा की गई थी कि 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम, साहस और बलिदान के कारण तय समयसीमा से पहले ही देश से नक्सलवाद का संपूर्ण खात्मा हो गया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संपूर्ण विकास की परिकल्पना को लॉन्च

गृह मंत्री ने कहा कि चौथी और सबसे अहम तिथि 19 मई, 2026 है क्योंकि इस दिन से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संपूर्ण विकास की परिकल्पना को लॉन्च किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक कुछ बुद्धिजीवी यह कहते रहे कि विकास न पहुंचने के कारण नक्सलवाद फैला, जबकि सच्चाई यह थी कि नक्सलवाद की वजह से ही विकास इन इलाकों तक नहीं पहुंच पाया।

अमित शाह ने कहा कि बस्तर के विकास के लिए केंद्र सरकार अब नई योजनाओं पर काम शुरू कर चुकी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ‘शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा’ का उद्घाटन किया गया है। यह योजना उन सुरक्षा कैंपों को विकास केंद्र में बदलने की पहल है, जिन्हें नक्सलवाद से लड़ने के लिए बनाया गया था।

उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में करीब 200 सुरक्षा कैंप स्थापित किए थे, जहां सीएपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान तैनात थे। अब नक्सलवाद समाप्त होने के बाद इनमें से 70 कैंपों को “शहीद वीर सेवा डेरा” में बदला जाएगा।

बस्तर में अब भय नहीं बल्कि विकास, रोजगार और समृद्धि की नई कहानी लिखी जाएगी

गृह मंत्री शाह ने कहा कि इन सेवा डेरों के माध्यम से बस्तर के प्रत्येक आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराई जाएगी। सहकारी मॉडल के जरिए उनके दूध का विपणन पूरे देश में किया जाएगा, जिससे आदिवासी परिवारों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र आर्थिक रूप से मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में अब भय नहीं बल्कि विकास, रोजगार और समृद्धि की नई कहानी लिखी जाएगी।

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