रायपुर, 18 मई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को घोषणा की कि भारत अब नक्सलवाद से मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के भारी बलिदान के बाद दशकों से चली आ रही यह बगावत आखिरकार हार गई है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में कभी माओवादी गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले जगदलपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘मैं गर्व से सीना तानकर कह सकता हूं कि भारत अब नक्सलियों से मुक्त हो चुका है।’
सरकार बस्तर में स्थायी शांति और तेज विकास सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध
छत्तीसगढ़ की तीन-दिवसीय यात्रा पर आए शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बस्तर में स्थायी शांति और तेज विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह आदिवासी क्षेत्र अगले पांच वर्षों के भीतर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनकर उभरेगा।
नक्सलियों के विरुद्ध लड़ाई को अपने शौर्य और साहस से जीतने वाले सभी साथियों से जगदलपुर में संवाद कर रहा हूँ… https://t.co/GklK3GUbUF
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बस्तर एकेडमी ऑफ डांस, आर्ट एंड लिटरेचर (BADAL) कैंपस में लोगों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने इस मौके को एक ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया और इस उपलब्धि का श्रेय, नक्सल-विरोधी अभियानों के दौरान पिछले कई सालों में सुरक्षाकर्मियों द्वारा दिए गए बलिदानों को दिया। उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐसा सपना था, जो कई सुरक्षाकर्मियों के अभियानों के दौरान अपनी जान कुर्बान करने के बाद पूरा हुआ है।’
वामपंथी उग्रवाद ने हिंसा के जरिए तीन पीढ़ियों को निगल लिया
शाह ने यह भी कहा कि वामपंथी उग्रवाद ने, जो 1970 के दशक में फैलना शुरू हुआ था, हिंसा के जरिए तीन पीढ़ियों को निगल लिया और लोगों को बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित रखा। उन्होंने कहा, ‘2014 में जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और वामपंथी उग्रवाद (LWE) से जुड़ी आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ थीं। आज, मैं कह सकता हूं कि कुल मिलाकर, देश ने इन तीनों चुनौतियों पर काबू पा लिया है।’
नक्सल मुक्त भारत अभियान के तहत 6 राज्यों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विशेष सुरक्षा बलों, पुलिस कर्मियों, बस्तर संभाग के नक्सल पीड़ितों और विभिन्न समाजों के प्रमुखों से जगदलपुर में संवाद किया।
मोदी जी के नेतृत्व में हम सभी के संयुक्त प्रयासों से देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्ति… pic.twitter.com/GtiHewjq6V
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कार्यक्रम के दौरान शाह ने नक्सली हिंसा में मारे गए नागरिकों के परिवारों, माओवाद-विरोधी अभियानों में बहादुरी के लिए सम्मानित सुरक्षाकर्मियों, और आदिवासी समुदाय के नेताओं के साथ भी बातचीत की। इन नेताओं ने उग्रवाद-प्रभावित वर्षों के अपने अनुभव साझा किए।
1000 से ज्यादा शहीद सुरक्षाकर्मियों को ‘अमर वाटिका’ स्मारक पर श्रद्धांजलि दी
गृह मंत्री ने ‘अमर वाटिका’ स्मारक पर उन 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने माओवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दी थी। उन्होंने कहा, ‘बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास लाने में हमारे जवानों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा।’
नक्सलमुक्त भारत बनाने में हमारे सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और बलिदान को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। जब नक्सलमुक्त भारत का इतिहास लिखा जाएगा, तब इन जवानों की शौर्यगाथा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगी।
आज जगदलपुर में शहीदों की स्मृति में निर्मित ‘अमर वाटिका’ में उन्हें… pic.twitter.com/3lEXkbjFHW
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आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा के समाज में स्वीकार करने की अपील
समाज से पूर्व विद्रोहियों के पुनर्वास में सहयोग करने का आग्रह करते हुए शाह ने बस्तर के सातों जिलों के समुदायिक नेताओं से अपील की कि वे अतीत की कड़वाहट को भुलाकर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा के समाज में स्वीकार करें। उन्होंने कहा, ‘राज्य में लगभग 3,000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। हमने उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। नरेंद्र मोदी सरकार इस दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।’
लगभग 200 CAPF शिविरों में 70 को ‘लोक सेवा केंद्रों’ में बदला जाएगा
शाह ने यह भी घोषणा की कि राज्य में मौजूद लगभग 200 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) शिविरों में से लगभग 70 शिविरों को ‘लोक सेवा केंद्रों’ में बदला जाएगा, जिनका उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करना है।
स्वाधीनता संग्राम के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक वीर सेनानी गुंडाधुर जी की जन्मभूमि बस्तर के नेतानार में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
उन्होंने जिस आजादी के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया था, वह आज नक्सलमुक्त भारत में सच्चे अर्थों में साकार हो रही… pic.twitter.com/UeonxDCICz— Amit Shah (@AmitShah) May 18, 2026
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय की देखरेख में बस्तर भर में सड़कों, ग्रामीण विकास परियोजनाओं, बैंक शाखाओं, डाकघरों, LPG की उपलब्धता, खाद्यान्न वितरण, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

