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अमित शाह ने दी सरहिंद फतह दिवस की शुभकामनाए, कहा- बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन राष्ट्र और धर्म रक्षा की प्रेरणाशक्ति

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नई दिल्ली, 12 मई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को ‘सरहिंद फतह दिवस’ की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर मन से वैरागी और धर्मरक्षा के लिए अदम्य योद्धा थे। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि धर्म के प्रति अटूट निष्ठा, मातृभूमि के प्रति पूर्ण समर्पण और अन्याय के विरुद्ध अद्भुत साहस की प्रतिमूर्ति बाबा बंदा सिंह बहादुर के ‘सरहिंद फतह दिवस’ की शुभकामनाएं। बाबा बंदा सिंह बहादुर मन से वैरागी और धर्मरक्षा के लिए अदम्य योद्धा थे।

उन्होंने किसानों को संगठित कर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और मुगलों को पराजित कर स्वाभिमान, साहस एवं धर्मरक्षा का अमर संदेश दिया। असंख्य अत्याचार सहने के बावजूद उन्होंने धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया। उनका जीवन सदैव राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए प्रेरणाशक्ति बना रहेगा। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में खालसा द्वारा सरहिंद की विजय और वजीर खान का अंत, केवल एक राजनीतिक जीत नहीं थी। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कलगीधर पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने शोषितों को ‘अमृत’ का उपहार प्रदान किया, जिससे वे उस समय के सबसे शक्तिशाली और अत्याचारी शासन का सामना करने में सक्षम हो सके।

“चप्पड़ चिड़ी की पावन धरती पर स्थित ‘फतेह बुर्ज’, बाबा बंदा सिंह बहादुर जी और सभी शहीद सिंहों के शौर्य का साक्षी है, जिन्होंने कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेश का पालन करते हुए, अपने अदम्य साहस से न्याय के विधान को स्थापित किया। ‘सरहिंद फतेह दिवस’ के पावन अवसर पर, हम बाबा बंदा सिंह बहादुर और सभी शहीद सिंहों के शौर्य को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ‘सरहिंद फतेह दिवस’ पर समस्त संगत को बधाई।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने एक्स पोस्ट में लिखा, “सरहिंद की विजय केवल किसी शहर या भौगोलिक क्षेत्र की जीत नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य की, अत्याचार पर न्याय की और दमन पर अधिकार की विजय है। सरहिंद विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि जब अत्याचार अपनी सीमाएं लांघ जाता है, तो सत्य और धर्म की शक्ति उसका अंत कर देती है। छोटे साहिबजादों की हृदयविदारक शहादत के बाद खालसा पंथ के भीतर जो रोष जागा था, उसी ने सरहिंद विजय की गाथा लिखी। सरहिंद विजय दिवस के अवसर पर, सरहिंद को जीतने वाले बाबा बंदा सिंह बहादुर के शौर्य को और सभी शहीद सिंहों को हमारी ओर से हार्दिक नमन। सरहिंद विजय दिवस पर समस्त संगत को लख-लख बधाइयां।”

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