नई दिल्ली, 22 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व में जारी संकट के बीच ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। रविवार की शाम आहूत बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य फोकस, देशभर में ईंधन, बिजली और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना था।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। भारत, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भारतीय नागरिकों को किसी भी तरह की कमी या कीमतों में अचानक उछाल का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पीएम मोदी ने गत 12 मार्च को कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने विश्वव्यापी ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है, जो राष्ट्रीय चरित्र की एक गंभीर परीक्षा है और इससे शांति, धैर्य एवं लोगों में अधिक जागरूकता के जरिए निबटने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘यह पता लगाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों से हम कैसे पार पा सकते हैं।’ पीएम मोदी ने इसी क्रम में दुनिया के कई नेताओं से बात की है और बातचीत व कूटनीतिक प्रयासों से मौजूदा संकट हल करने पर जोर दिया है।
स्मरण रहे कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर गत 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई थी। ईरान ने जवाबी काररवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया। इसी क्रम में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बाधित कर दिया है, जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इससे गुजरने की अनुमति दी है। इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया है।

