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कोटा में प्रसूताओं की मौत पर एक्शन : एक वरिष्ठ चिकित्सक और दो नर्सिंगकर्मी सस्पेंड, एक यूटीबी चिकित्सक बर्खास्त

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जयपुर, 9 मई। कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की मौत एवं तबीयत बिगड़ने के प्रकरण को राज्य सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रकरण में निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने उपचाराधीन प्रसूताओं को श्रेष्ठतम उपचार उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

चिकित्सा मंत्री के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल ने शुक्रवार को कोटा पहुंचकर घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की। संबंधित चिकित्सकों, नर्सिंग कार्मिकों एवं अस्पताल प्रशासन से जानकारी ली तथा उपचार व्यवस्थाओं का जायजा लिया। शुक्रवार देर रात ही राज्य सरकार ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए एक चिकित्सक सहित दो नर्सिंगकर्मियों को निलंबित कर दिया। साथ ही, यूटीबी पर कार्यरत एक चिकित्सक को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही, दो चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रकरण की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया चिकित्सा प्रोटोकॉल एवं प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आने पर विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सह आचार्य जनरल सर्जरी विभाग डॉ. नवनीत कुमार को निलंबित कर दिया है। साथ ही, यूटीबी पर कार्यरत सहायक आचार्य डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को बर्खास्त कर दिया है। प्रकरण में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई है। कार्य में लापरवाही, निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल की अनुपालना में कमी तथा मरीजों की निगरानी में शिथिलता को लेकर सीनियर नर्सिंग अधिकारी गुरजौत कौर एवं निमेश वर्मा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय जयपुर किया गया है।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार एवं यूनिट हेड डॉ. नेहा सीहरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में अस्पताल में हुई गंभीर घटना के संबंध में पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारी, उपचार प्रक्रिया की मॉनिटरिंग, ऑपरेशन उपरांत निगरानी तथा समन्वय व्यवस्था में संभावित लापरवाही तथा चिकित्सकीय व्यवस्थाओं में कमी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि अस्पताल में भर्ती सभी प्रसूताओं की स्वास्थ्य स्थिति की निरंतर समीक्षा करते हुए चिकित्सकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक मरीज को विशेषज्ञ चिकित्सकीय निगरानी में सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राठौड़ ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि ऑपरेशन थिएटर प्रबंधन, एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल, दवा वितरण प्रणाली तथा पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु जवाबदेही तय करने, सुपरविजन व्यवस्था मजबूत करने तथा चिकित्सा गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। राज्य सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले सभी अधिकारी, चिकित्सक अथवा कार्मिक के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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