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बांग्लादेश : मशहूर लेखक हुमायूं आजाद की हत्या में शामिल जमात-उल-मुजाहिदीन के 4 सदस्यों को फांसी की सजा

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ढाका, 13 अप्रैल। बांग्लादेश की अदालत ने लगभग दो दशक पहले मशहूर लेखक व प्रोफेसर हुमायूं आजाद की हत्या में शामिल आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के चार कट्टरपंथियों को बुधवार को मौत की सजा सुनाई। करीब डेढ़ दशकों तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी चार आरोपितों को हत्या का कसूरवार ठहराते हुए मौत की सजा दी।

प्रो. हुमायूं को 2004 में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पुस्तक मेले के बाहर बनाया था निशाना

प्रोफेसर हुमायूं आजाद वर्ष 2004 में पुस्तक मेले के बाहर मुस्लिम धार्मिक कट्टरपंथियों ने निशाने पर आ गए थे और उनपर बहुत ही निर्मम तरीके से हमला किया गया था। इस्लामिक मुल्क बांग्लादेश में फ्री स्पीच की आजाव को बुलंद करने वाले प्रोफेसर आजाद पर हमले की यह पहली वारदात थी। कट्टरपंथियों ने इस तरह से किसी विरोधी को मारने के लिए बर्बरतापूर्वक सरेआम हमला किया था।

इलाज के दौरान जर्मनी में हुई थी प्रो. आजाद की मौत

कट्टरपंथियों के हमले में घायल 56 वर्षीय आजाद की कुछ महीनों के बाद जर्मनी में इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष लोगों ने अपना दुख और विरोध प्रदर्शित किया था।

आजाद की हत्या में शामिल दो आरोपित अब भी फरार

आजाद की हत्या में शामिल दो आरोपित अब भी फरार हैं, वहीं पांचवा आरोपित वर्ष 2014 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में उस समय मारा गया था, जब वह पुलिस वैन से फरार होने की कोशिश कर रहा था। इस केस के सरकारी वकील अब्दुल्लाह अबु ने बताया कि कोर्ट ने कुल चार लोगों को आजाद की हत्या में फांसी की सजा दी है, जिसमें से दो अब भी फरार हैं।

इस हत्याकांड को जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के आतंकियों ने उस समय अंजाम दिया, जब हुमायूं आजाद ने कट्टपंथियों के खिलाफ अपनी किताब में लिखा और उनकी आतंकी गतिविधियों की आलोचना की थी। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश वही आकंती संगठन है, जिसने साल 2007 में पूरे देश में कई जगहों पर लगातार बम धमाकों को अंजाम दिया था।

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